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|Best 50+| Jaun Elia Sad Poetry जाऊं एलिया सैड पोएट्री हिंदी। (2024)

Jaun Elia Sad Poetry
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Jaun Elia Sad Poetryदोस्तों आज हम आपके लिए लाये है उर्दू के महान शायर जॉन एलिया की सैड कविताएँ हिंदी में।
अगर आप jaun elia को नही जानते तो हम बता दे की ये पाकिस्तान के एक जाने पहचाने शायर थे। जॉन एलिया ने दुनिया को अलविदा तो 8 नवम्बर 2002 को ही बोल दिया था लेकिन इनकी दर्द भरी शायरी और कविता आज भी सोशल मिडिया पर बहुत लोगों को पसंद आती हैं और YouTube, Facebook, जैसे सोशल मिडिया पर लोग इनकी शायरी को आज भी बहुत पसंद करते हैं।
जॉन एलिया आज भी युवाओ की पहली पसंद हुआ करते हैं । jaun elia की दिल को छू जाने वाली शायरी के दिवाने पाकिस्तान में ही नही बल्कि भारत में भी बहुत है। 

 

Jaun Elia Sad Poetry in Hindi  जॉन एलिया कविता कोश

 

Naa hua naseeb karaar e jaan
Hawas e karaar bhi ab nhi
Tera intezaar bahut kiya
Tera intezaar bhi ab nhi
Vo jo apni jaan se gujar gaye unhe kya khabar hai ke shahar mein
kise jaannisaar ka zikr kya Koi saugawaar bhi ab nhi..... 

ना हुआ नसीब करार ऐ जान
हवस ए करार भी अब नही
तेरा इंतजार बहुत किया, तेरा इंतजार भी अब नहीं
वो जो अपनी जान से गुजर गए उन्हे क्या खबर है कि शहर में
किसी जानिसार का ज़िक्र क्या कोई सौगवार भी अब नही।

 

Aye khuda jo kahi nhi maujood
Kya likha hai humare kismat mein
Zindagi kis tarah basar hogi
Dil nhi lag raha Ab mohabbat mein....


ऐ खुदा जो कहीं नही मौजूद क्या लिखा है 
हमारी किस्मत में
ज़िंदगी किस तरह बसर होंगी
दिल नही लग रहा अब मोहब्बत में। 

 

Mar chuka hai dil magar zinda hu mai
Zahar jaise kuch davaye chahiye
Puchte hai aap, Aap achhe toh hai
Ji mai achha hu duaye chahiye. .. ..


मर चुका है दिल मगर जिंदा हूँ मै
ज़हर जैसी कुछ दवाएं चाहिए
पूछते हैं आप, आप अच्छे तो है
जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए। 

 

Jab aaoge toh khoya hua paoge mujhe
Meri tanhaai me khwaab ke siva kuch bhi nhi
Mere kamre ko sazane ki tamanna hai tumhe
Mere kamre mein kitaabo ke siva kuch nhi...

जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे
मेरी तन्हाई में ख्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं
मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें
मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ नहीं। 
jaun elia sad poetry in english

jaun elia sad poetry in english
 
 
Ab toh jis dour bhi gujar jaye 
Koi israar zindagi se nhi
Uske gam mein kiya sabhi ko maaf
Koi sikhba bhi ab kisi se nhi.... 

 
अब तो जिस दौर भी गुजर जाए 
कोई इसरार जिंदगी से नहीं
उसके गम में किया सभी को माफ
कोई शिकवा भी अब किसी से नहीं

 

Jaun Elia best poetry in Hindi दिल को छू जाने वाली शायरी

 

Yeh kuch Aasann toh nhi hai
Ki hum ruthte ab bhi hai muravvat mein
Aur vo jo tamir hone wali the
Lag gayi aag uss imaarat mein....

ये कुछ आसान तो नही है कि हम रूठे अब भी है
मुरब्बत मे
और वो जो तामीर होने वाली थी
लग गयी आग उस इमारत में

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Ak hi haadsa toh hai aur vo ye ki
Aaj tak baat nhi kahi gayi
Baat nhi suni gayi
Baad bhi tere jane jaan dil mein rha ajb shama
Yaad rhi teri, fir teri yaad bhi gayi..... 

एक ही हादसा तो है और वो ये कि आज तक बात नहीं कही गई  बात नही सुनी गयी
बाद भी तेरे जाने जान दिल में रहा अजब समा
याद रही तेरी यहाँ,फिर तेरी याद भी गयी।

 

Kitne dilkash hoon tum kitna dil ju hu mai
Kya sitam hai ki hum log mar jayenge... 

कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल जू हूं मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएंगे। 

 

Ye gam kya dil ki aadat hai? Nhi toh
Kisi se kuch sikayat hai? Nhi toh
Hai vo ek khwaab-e-be taveer
Usko bhula dene ki niyat hai? Nhi toh
Kisi ke bin kisi ki yaad ke bin
Jiye jane ki himmat hai? Nhi toh
Kisi surat bhi dil lagta nhi? Haa
Toh kuch dil se yah halat hai? Nhi toh
Tere iss haal par hai sabko hairat
Tujhe bhi iss par hairat hai? Nhi toh
Vo darveshi jo taj kar aa gaya Tu
Yah daulat uski kimat hai? Nhi toh
Hua jo kuch yhi maksoom tha kya?
Yahi Sare hakayat hai? Nhi toh
Ajiyatnaak Ummedon se tujko
Aman pane ki hasrat hai? Nhi toh
Ye gam kya dil ki aadat hai? Nhi toh
Kise se kuch sikayat hai? Nhi toh. 

ये गम क्या दिल की आदत है ? नहीं तो
किसी से कुछ शिकायत है ? नहीं तो
है वो इक ख्वाब-ए-बे ताबीर
उसको भुला देने की नियत है ? नहीं तो
किसी के बिन किसी की याद के बिन
जिए जाने की हिम्मत है ? नहीं तो
किसी सूरत भी दिल लगता नहीं ? हां
तो कुछ दिन से यह हालत है ?  नहीं तो
तेरे इस हाल पर है सबको हैरत
तुझे भी इस पर हैरत है ? नहीं तो
वो दरवेशी जो तज कर आ गया तू
यह दौलत उसकी कीमत है ? नहीं तो
हुआ जो कुछ यही मकसूम था क्या
यही सारी हकायत है ? नही तो
अजीयत नाक उमीदों से तुझको
अमन पाने की हसरत है ? नही तो
यह गम क्या दिल की आदत है? नही तो
किसी से कुछ शिकायत है ? नहीं तो

 

John Elia Urdu Poetry 2 Lines

 

अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं

Apne saab yaar kaam kar rahe hai
Aur hum hai ki naam kar rahe hai.... 

 

हालत ए वसल में भी हम दोनों
लम्हा लम्हा जुदाई करते हैं। 

Halat-e-wasal main bhi hum dono
Lamha Lamha judai karte hain

 

बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या?

Bahut najdeek aati ja rahi ho
Bichhadne ka iraada kar liya kya... 

 

ये मुझे चैन क्यों नही पड़ता
एक ही सख्स था क्या जहाँन में क्या? 

Ye Mujhe chain kyun ni padta
Ek hi shakhs tha jahan me kya..... 

 

मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं

Mai bhi bahut ajeeb hu itna ajeeb hu ki bas
Khud ko tabah kar liya aur malal bhi nhi.... 

 

रोया हूँ तो अपने दोस्तों में
पर तुझ से तो हँस के ही मिला हूँ।

Roya hu toh apne doston mein
Par tujhe se toh has ke hi mila hu....... 

 

उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं । 

Us gali ne ye sun ke sabr kiya
Jaane waale yahan ke the hi nahin

 

एक हवेली थी दिल मोहल्ले में
अब वो वीरान हो गई । 

Ek haveli thi dil mohalle mein
Ab vo veeran ho gayi... 
 
तेरे बगैर मुझे चैन कैसे पड़ता है
और मेरे बगैर तुझे नींद कैसे आती है। 

Tere bagair mujhe chain kaise padta hai
Aur mere bagair tujhe nind kaise aate hai

 

Mere kamre ka kya byaa ki yaha khoon thuka gya shararat mein
Ruh ne ishq ka fareb diya jism ko jism ki adavat mein
Ab fakat aadaton ki Wargish hai
Ruh shaamil nhi shikayton mein... 

मेरे कमरे का क्या बया की यहां खून थूका गया शरारत मे
रुह ने इश्क़ का फरेब दिया जिस्म को जिस्म की अदावत मे
अब फकत आदतों की वर्जिश है रूह शामिल नहीं शिकायतों में। 

 

Jaun Elia Shayari जॉन एलिया के मशहूर शेर

 

Khwaishe dil ka sath chhod gai
Ye ajiyat badi ajiyat hai
Log mashroof jante hai mujhe
Yaha mera gam hi meri fursat hai... 

ख्वाहिशें दिल का साथ छोड़ गयी
ये अजीयत बड़ी अजीयत है
लोग मसरूफ जानते हैं मुझे
यहां मेरा गम ही मेरी फुर्सत है। 

 

jaun elia sad poetry in urdu
jaun elia sad poetry in urdu

 

Jaun tumhe yeh dour mubarak door gam
Aur aalam se ho
Ak ladkey ke dil ko Dukhakar ab toh bada
Aram se ho
Ak mahakti angdaai ke Mustakbil ka khoon kiya
Tumne uska dil rakha ya uske dil ka khoon kiya.. 

जॉन तुम्हें यह दौर मुबारक दूर गम और आलम से हो
एक लड़की के दिल को दुखा कर अब तो बड़े आराम से हो
एक महकती अंगड़ाई के मुस्तकबिल का खून किया
तुमने उसका दिल रखा या उसके दिल का खून किया। 

 

Kya sitam hai ki ab teri surat gaur krne Par Yaad aate hai
Kaun iss ghar ki dhekbal kare rooj ak chij toot jate hai... 


क्या सितम है कि अब तेरी सूरत गौर करने पर याद आती है।
कौन इस घर की देखभाल करें रोज एक चीज टूट जाती है। 

Sad Poetry in Urdu by Jaun Elia

 

Har Bar Mere Samne Aati Rahi Ho Tum
Har Bar Tumse Milkar bichhadta Raha Hun Main
Tum kaun ho yah Khud bhi nahin janti ho tum
Main Kaun hun yah Khud bhi nahin Jaanta Hun Main
Tum Mujhko Jaan Kar Hi Padi Ho Ajab mein
Aur Is Tarah Khud apni Saja Ban Gaya Hun Main.. 

हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम
हर बार तुमसे मिलकर बिछड़ता रहा हूं मैं
तुम कौन हो यह खुद भी नहीं जानती हो तुम
मैं कौन हूं यह खुद भी नहीं जानता हूं मैं
तुम मुझको जानकर ही पड़ी हो अजाब में
और इस तरह खुद अपनी सजा बन गया हूं मैं। 

 

Ruh piyasi kahan se Aati Hai
Yah udaasi kahan se Aati Hai
Dil Hai Sab sokhta so-e- Umeed tu nida si
Kaha se aati
Shok me aish-e-wasal ke hangaam
Naspasi kaha se aati hai
Ak zindaan-e-bedili aur shaam ye shabasi
Kaha se aate hai
Tu hai pahlu me fir tere khushboo ho ke
Basi kaha se aate hai.... 

रूह प्यासी कहां से आती है, ये उदासी कहां से आती है
दिल है सब सोखता सो- ए- उम्मीद तू निदा सी कहाँ से आती हैं
शौक में ऐश ए वसल के हंगाम नासपासी कहाँ से आती है
एक जिंदान ए वेदिली और शाम ये शाबाशी कहाँ से आती है
तू है पहलू में फिर तेरी खुशबू हो के बासी कहाँ से आती है। 
Yah bhi Mumkin hai ki aankh bhigone lag jaaun
Vo kahe kaise ho aap? Aur mai rone lag jau. 

यह भी मुमकिन है कि आंख भिगोने लग जाऊं
वो कहे कैसे हो आप ? और मैं रोने लग जाऊ
 
 
Ak hushn-e-Bemisal ki tamsil ke liye
Parchaiyo par rang girata raha hu mai
Sayed mujhe kise se mohabbat nhi hui
Par yakeen sab ko dilata raha hu mai.. 


एक हुस्न ए बेमिसाल की तमसील के लिए
परछाईयो पर रंग गिराता रहा हूँ मैं
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नही हुई
पर यकीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं। 

 

Sad Shayari Jaun Elia

 

Kitne aish udate honge kitne itrate honge
Jane kaise log vo honge jo uss ko bhate honge
Yaaro kuch toh zikr karo tum uski kayamat baho ka
Vo jo simatte honge unn me vo toh mar jate honge...

कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे । 

 

Yeh mujhe chain kyu nhi padta
Ak hi shaksh tha jahan me kya? 

ये मुझे चैन क्यूं नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या? 
Bahut nazdik aati jaa rahe ho
Bichadne ka irada kar liya kya?

बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या? 
kitna ruya me teri khatir
ab ju suchun tu hansi aati he

कितना रोया मै तेरी खातिर
अब जो सोचू तो हँसी आती है। 

Final world’s on Jaun Elia Sad Poetry

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